Tuesday, November 6, 2018

सऊदी अरब बनाएगा पहला परमाणु रिएक्टर

सऊदी अरब की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने ख़बर दी है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद-बिन सलमान ने देश का पहला परमाणु रिएक्टर बनाने के लिए योजना की घोषणा की है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद-बिन सलमान ने सोमवार को इस योजना की आधारशिला भी रख दी है.
सऊदी अरब का परमाणु सपना और अमरीका की परेशानी
सऊदी प्रेस एजेंसी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि ये रिएक्टर किस तरह का होगा.
मसलन क्या इसका इस्तेमाल शोध, विकास और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, इस बारे में कुछ नहीं बताया गया है.
कच्चे तेल का सबसे बड़ा निर्यातक सऊदी अरब तेज़ी से बढ़ रही अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को फिलहाल तेल और प्राकृतिक गैस से पूरा करता है.
सऊदी अरब की अगले दो दशक में 16 परमाणु रिएक्टर बनाने की योजना है जिस पर लगभग 80 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है.
अमरीका में 6 नंवबर को अमरीकी कांग्रेस या प्रतिनिधि सभा और सीनेट की कुछ सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं. इस चुनावी दंगल में अमरीका की प्रतिनिधि सभा के लिए सबसे अधिक भारतीय मूल के कूल 12 उम्मीदवार अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
इनमें सबसे अहम एरिज़ोना प्रांत में हीरल तिपिर्नेनी डिस्ट्रिक्ट आठ से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हैं जो रिपब्लिकन पार्टी की मौजूदा सांसद डेबी सेल्को को कड़ी टक्कर दे रही हैं.
एरिज़ोना प्रांत को रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है तो ऐसे में एक भारतीय मूल के उम्मीदवार की हैसियत से हीरल तिपिर्नेनी अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि एरिज़ोना में अब तक किसी ने रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी चुनौती नहीं दी.
हीरल तिपिर्नेनी कहती हैं, "अभी भी एरिज़ोना में यह बहुत कम ही नज़र आता है कि भारतीय मूल के लोग चुनाव में खड़े हों....लेकिन हम इस बार पिछले कई वर्षों में पहली बार रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी चुनौती दे रहे हैं जो अब तक नहीं दी गई...हम कांटे की टक्कर दे रहे हैं."
पेशे से डॉक्टर हीरल तिपिर्नेनी बताती हैं कि उनके मुख्य चुनावी मुद्दे हैं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरी लाना और प्रवासी क़ानून में बेहतर सुधार करना.
डॉक्टर हीरल तिपिर्नेनी बताती हैं कि उनके पति और तीन बच्चों समेत उनका पूरा परिवार चुनावी मुहिम में लगा हुहै. इसके अलावा भारत में रह रहे उनके परिवार के सदस्य भी उनको प्रोत्साहन दे रहे हैं. वो बताती हैं कि अक्सर भारत का चक्कर लगा आती हैं. वो आंध्र प्रदेश और गुजरात में अपने परिवार वालों के साथ समय भी गुज़ारती हैं.
इसी तरह भारतीय मूल की अनीता मलिक भी एरिज़ोना के डिस्ट्रिक्ट आठ से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हैं. उनका मुक़ाबला है रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सांसद डेविड शवायकार्ट के साथ.
अनीता मलिक बताती हैं कि एरिज़ोना में बहुत से लोग राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियों से नाराज़ होकर डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देना चाहते हैं. अनीता मलिक कहती हैं, "अरीज़ोना में कुछ वोटरों में तो नाराज़गी इस कदर है कि वो तो सिर्फ़ राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट देने के लिए निकलना चाहते हैं. बहुत से ऐसे भी हैं जो स्थानीय मुद्दों पर अपना वोट देना चाहते हैं."
अनीता मलिक के माता-पिता भारत में दिल्ली और पूना में रहते थे और वहां से अमरीका में आकर बस गए. अनीता ने पिछले साल तक एक टेक्नोलॉजी कंपनी में सीओओ की हैसियत से नौकरी की.
वो नौकरी छोड़कर 2017 में ही राजनीति में आईं.अनीता मलिक बताती हैं कि अब धीरे-धीरे एरिज़ोना में भारतीय मूल के लोग राजनीति में बढ़-चढ़ कर भाग लेना शुरू कर रहे हैं.
उनका कहना है कि उनके लिए सबसे अहम चुनावी मुद्दे हैं स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार. इसके अलावा वो अमरीकी चुनावी प्रणाली में धन के बेतहाशा इस्तेमाल के बारे में भी कुछ करना चाहती हैं, जिससे आम लोगों को भी चुनाव में खड़े होने का मौक़ा मिले.
अनीता कहती हैं कि वैसे लोग भी चुनाव लड़ना चाहते हैं जो लाखों डॉलर जुटाने की क्षमता नहीं रखते हैं.
भारतीय मूल की मौजूदा कांग्रेस की सदस्या डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमिला जयपाल वॉशिंगटन प्रांत से फिर चुनाव लड़ रही हैं. इसके अलावा कैलिफ़ोर्निया से मौजूदा कांग्रेस सदस्य डेमोक्रेटिक पार्टी के रो खन्ना और अमी बेरा फिर से चुनाव लड़ रहे हैं.