Wednesday, September 19, 2018

क्या रात के ढाई बजे जग जाना है कामयाबी का राज़?

हॉलीवुड स्टार और दो बार ऑस्कर पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किए गए मार्क वॉलबर्ग ने पिछले हफ्ते ख़ुलासा किया कि वे रात के ढाई बजे जग जाते हैं.
जब आप सो रहे होते हैं, उस वक़्त वॉलबर्ग जिम में कसरत कर रहे होते हैं. वे जिम में 90 मिनट बिताते हैं. फिर गोल्फ़ खेलते हैं और प्रार्थना करते हैं. वॉलबर्ग शाम में साढ़े सात बजे ही सोने चले जाते हैं.
जल्दी जगने वालों में वॉलबर्ग अकेले नहीं हैं. ऐप्पल के सीईओ टिम कुक सुबह पौने चार बजे जगते हैं. डिज़्नी के बॉस बॉब आइगर सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर वर्कआउट शुरू कर देते हैं.
अमरीका में एनबीए के खिलाड़ी भी सुबह बहुत जल्दी जिम में पहुंच जाते हैं.
कॉरपोरेट जगत के कामयाब लोगों के प्रोफ़ाइल में एक बात आम दिखती है कि अगर आप सफल होना चाहते हैं तो जल्दी उठिए.या हम सबको जल्दी जगना चाहिए? क्या इससे हमें ज्यादा काम करने में मदद मिलेगी?
हो सकता है कि ऐसा हो, लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है.
रात के ढाई बजे दिन की शुरुआत करने का मतलब है बहुत ही लंबा दिन और लगभग न के बराबर आराम. लेकिन वॉलबर्ग के सोने के वक़्त को देखकर लगता है कि वे हर रोज़ सात घंटे ज़रूर सोते हैं.
काम करने के लिए यह ज़रूरी है. नींद से समझौता हो तो सेहत बिगड़ जाती है. दिमाग भी सही से नहीं चलता.
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के क्रिस्टोफर बार्न्स और मिशिगन यूनिवर्सिटी की ग्रेचेन स्प्रिट्ज़र ने इस विषय पर गहन शोध किया. उनके सामने प्रश्न यह था कि क्या कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर्मचारी पूरी नींद लें
वॉलबर्ग के मामले में स्प्रिट्ज़र का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ अपने वर्किंग शिड्यूल को अलग समय में शिफ्ट किया है. सुबह बहुत जल्दी उठने से ऐसा लगता है कि वे ज्यादा काम करते हैं.
स्प्रिट्ज़र कहती हैं, "कुछ फायदे तो अवश्य हैं. आप एक अनुशासन में बंधते हैं और अपने लिए ज्यादा वक़्त निकाल पाते हैं. परिवार वालों के जगने से और सहकर्मियों के मिलने से पहले आप अपना काम कर चुके होते हैं."
लेकिन बहुत जल्दी सोने से सामाजिक संबंधों को नुकसान होता है. सामाजिक रिश्ते नहीं बन पाते, जो अच्छी मानसिक सेहत के लिए जरूरी हैं.
शाम के साढ़े सात बजे ही बेडरूम में चले जाने का मतलब है कि आप परिवार के साथ डिनर नहीं कर पा रहे और दोस्तों के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा नहीं ले पा रहे.
इंसान के सोने और जगने का समय उनके शरीर की आंतरिक घड़ी से नियंत्रित होता है. शरीर खुद सिग्नल देता है कि कब सोना है और कब जगना है.
कई लोग तय समय पर जगने और तय समय पर सोने के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि अलग टाइम ज़ोन में जाने पर उनका शरीर बुरी तरह जेटलैग का शिकार हो जाता है.
सोने और जगने के समय के आधार पर शोधकर्ता लोगों को मोटे तौर पर दो समूहों में बांटते हैं.
जल्दी जगने और जल्दी सोने वालों को चकवा (पक्षी) की तरह कहा जाता है. देर से सोने और देर से जगने वालों को उल्लू की संज्ञा दी जाती है.
बार्न्स कहते हैं कि बचपन में लगभग सभी व्यक्ति चकवा की तरह होते हैं. वे जल्दी जगते और जल्दी सो जाते हैं.
जवानी आते ही इंसान उल्लू की तरह होने लगता है. उसे देर से नींद आती है और वह देर से ही जगना चाहता है. बुढ़ापे में इंसान फिर से जल्दी जगने और जल्दी सोने लगता है.
बार्न्स मानते हैं मार्क वॉलबर्ग की तरह रात के ढाई बजे जगने वाले व्यक्ति विरले होते हैं. "मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक रूप से आप सबसे अच्छा तब महसूस करते हैं, जब अपने शरीर की आंतरिक घड़ी के अनुसार सोते और जगते हैं."
जो लोग शरीर की आंतरिक घड़ी को नज़रअंदाज़ करके अपने के साथ ज़्यादती करते हैं और दूसरों को भी ऐसा करने को प्रेरित करते हैं, वे किसी और लक्ष्य से प्रेरित होते हैं.
धौंस जमाने की कोशिश
जल्दी जगने वाले लोग इस बात को लेकर दूसरे पर रौब क्यों गांठते हैं? ऐसा करके वे दिखाना चाहते हैं कि वे ज्यादा काम करते हैं.
भारत सहित कई देशों की संस्कृतियों में ऐसा मान लिया गया है कि जो लोग जल्दी जगते हैं वे ज्यादा अच्छे होते हैं.
2014 में 120 वयस्क लोगों पर एक अध्ययन हुआ था जिसमें पाया गया कि जिन्होंने दिन में देर से काम शुरू किया, उनको सुपरवाइजर से खराब रेटिंग मिली. सुपरवाइजर ने उनको कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी नहीं माना.
दिलचस्प है कि जो सुपरवाइजर खुद देर से जगने वाले थे उन्होंने कम नकारात्मक रेटिंग दी.
बार्न्स कहते हैं, "लोग आपके काम को आपके शिड्यूल के हिसाब से भी आंकते हैं. अगर आप सुबह जल्दी अपना काम शुरू करते हैं तो आपको पसंद किया जाता है."
सवाल है कि आप हासिल क्या करना चाहते हैं? क्या आप सिर्फ लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं?
अगर आप सुन सकते हैं तो अपने शरीर की सुनिए. यह समझिए कि आपके शरीर को कब आराम की जरूरत है.
यदि आप अधिक काम करने के लिए सुबह जल्दी उठ रहे हैं तो अपने काम का मूल्यांकन कीजिए. खुद से यह जरूर पूछिए कि आप सुबह बहुत जल्दी क्यों उठ रहे हैं- ज्यादा काम करने के लिए या किसी को प्रभावित करने के लिए?
वजह चाहे जो हो, आपकी सेहत सबसे जरूरी है. बार्न्स के शोध ने दिखाया है कि जबर्दस्ती जगना और शरीर को काम में लगना अनैतिक है.
बार्न्स कहते हैं, "अगर आप काम में मन नहीं लगा पा रहे हैं तो आप गलतियां करेंगे." इस स्थिति से बचने की जरूरत है.

Tuesday, September 11, 2018

森林受损引致高额代价

生态系统和生物多样性的经济学》评论指出,森林受损带来的全球经济损失可能比金融危机还要大。这项由欧盟委托进行的研究表示,每年由于森林遭破坏而带来的损失可高达2万亿至5万亿美元,约占全球 的7%。

主持研究的德意志银行的经济学家佩文·苏克德夫说,森林提供多种多样的免费服务,如吸收二氧化碳和提供净水等,这些活动有着极大价值。所以,由森林砍伐导致的“自然资本”的丧失,不仅超过了金融危机带来的损失,同时年复一年地继续着它的恶果。

一些环境保护主义者并不因此而大力提倡减少破坏生态系统和保护物种,反而将这一计算方法看作是游说政府以获得更多的自然保护基金的新方法。人类的经济系统将必须面临两种选择:设法履行森林的职能或者是不做任何弥补措施。无论选择哪种,人类都将付出代价。

该报告于上周在西班牙巴塞罗那召开的世界自然保护大会上进行了讨论。整个报告将在2010年中完成。到那个时候,由于各国政府遵守实施《生物多样性公约》,生物多样性丧失的速度应已有所减缓。
该报说,欧盟的最高政治机构—欧盟理事会将促进在下年的哥本哈根气候谈判中达成新的协议并从中取消承诺过的减排量,不再遵守即将增加的减排量上限。该委员会还打算鼓励各国在海外大量购买减排量,从而避免增加欧盟自己的减排负担。

欧盟本计划将其减排量从20 %提升到2020年的30 %,条件是在2009年12月的哥本哈根会议上可以形成一个全球性的气候协议。但是,其最近的出台的一些文件表明,欧盟将寻求新的立法程序以避免设定实现超过20%减排量的时限。实际上,欧盟将需要很多年才能使其减排从20%上升到30%。

环保人士担心,欧盟为实现减排目标所作的努力是不够的。国际地球之友的负责人汤姆·皮肯说,欧盟仅通过在发展中国家购买廉价的减排项目,将不可能促进各国实现经济转型,而这样的转型正是避免气候变化所带来的危险而必需的。
据《路透社》报道,国际海事组织在伦敦举行的会议就限制与航运业有关的硫排放达成了一致。这一新协议的实施将减轻由二氧化硫带来的空气和海洋污染,但会对石油业和航运业带来损失。

该协议规定,在2010年前,在二氧化硫排放特别管制区内,航运造成的硫排放必须从目前的1.5 %减少到1 %。在2015年前,该限额将下降到0.1 %。

目前,世界上仅存有北海和波罗的海两个特别管制区。然而,欧盟国家、美国、日本、新加坡和澳大利亚的某些海域将在限制协议生效时同时被列入管制区。

国际海运公会秘书西蒙∙本内特说,为实现协议规定的减排限额,海运业可能遭受近十亿美元的损失。50,000支远洋船将停止燃烧重油而转而使用清洁的燃料,这将可能引起公路运输燃料价格的上涨。

Saturday, September 1, 2018

厄瓜多尔激辩雨林拍卖计划

厄瓜多尔总统拉斐尔·科雷亚计划将300万公顷亚马逊热带雨林出售给包括中国公司在内的外国石油公司,这一方案引发了厄瓜多尔国内激烈的争论。

科雷亚的拍卖计划旨在利用厄瓜多尔的石油资源减少国债总额。截至去年夏天,这个南美洲国家仅对中国的债务总额就已经高达70亿美元,占到该国国内生产总值的10%。但科雷亚的计划目前正面临着来自国内和国际社会双方面的压力。

拍卖程序现已开始,将一直持续到五月底。过去几个月内,科雷亚总统在推销方面做足了功课,他派遣的代表团先后在德克萨斯和巴黎举行了多场路演,最终于3月25日来到北京。

包括中国石化和中海油在内的中国公司都出席了北京的路演,并极有希望成为最终的赢家。“中国企业非常积极。到了投标阶段,他们很有可能胜出,”厄瓜多尔油气部长安德烈斯·多诺索·法巴拉表示。

在厄瓜多尔官方代表团在世界各国举办路演的同时,国内的原住民以拍卖将威胁他们的土地和生计为由发起了抗议。

事态在近几周之内愈演愈烈,原因就在于20名当地达洛美那内部族的成员被华拉尼部族所杀。厄瓜多尔国内报纸认为,这起发生于3月29日的谋杀事件与石油公司在这一地区的活动有间接联系。当地日报《商报》在一篇报道中指出:

“集体权益观察组织的协调员爱德华多·皮奇林格接受Radio Vision采访时表示,(华拉尼和塔盖里-达洛美那内)两个部族之间的纷争源自西方社会的外部干涉,惨剧之所以会发生就是因为‘原住民保护政策与厄瓜多尔的石油开采政策不能兼容。’”

科雷亚总统对此反唇相讥,表示原住民之死“与石油公司无关,完全是部族之间的问题。”但许多厄瓜多尔团体都坚决反对继续拍卖热带雨林土地,因为那样会进一步破坏热带雨林的环境。

当地原住民团体首领4月9日开会决定坚决反对科雷亚总统的拍卖计划,并呼吁各对立部族团结一致。新闻网站 报道中称:

“’热带雨林不能买卖。亚马逊雨林是无价的,‘亚马逊部落议会主席米尔顿·卡雷拉强调。施维阿尔族首领费尔南多·桑蒂表示,各部族需要团结一致抵制政府目前在亚马逊中南部地区实施的石油开采政策。”

科雷亚为其推进热带雨林土地拍卖的决定辩解,他表示开发项目将执行最高的环境标准。他说,政府作出这一决定是基于绝对的经济需要,正如当地报纸《日报》在报道中称:

“’有些反对拍卖的人说自己是热爱大自然的人道主义者,而科雷亚憎恶大自然……这些白痴的愚昧会让国家破产……我们必须开发更多的石油,否则我们的能源网络就无法持续。如果我们不能进一步开采我们的石油储备,我们的国家2020年之前就会破产。‘”

原住民团体之外的许多厄瓜多尔评论家都承认,面临严峻经济形势的厄瓜多尔别无选择,只能将雨林土地拍卖进行下去。但他们仍然强烈希望这次的项目能避免石油开采过程中常见的环境和社会方面的负面影响。爱德华多·纳兰霍·克鲁兹在厄瓜多尔《时报》撰文提出:

“亚马逊雨林最大的敌人就是无法抑制的毁林和随之而来的殖民,而为了方便石油开采而铺设的公路会使问题雪上加霜。这一点对于亚苏尼森林公园以及亚马逊南部地区的开发同样适用。要解决以上问题就需要规范严格的合同,规定这一地区的开发过程中只能使用空运。虽然空运成本高于公路运输,但技术过硬的企业都能做到这一点。”