Thursday, May 23, 2019

ये मुहिम सामाजिक वैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों और इं

पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या बच्ची के साथ बलात्कार और टॉर्चर हुआ है. इस बीच उसे न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. मंगलवार को इस्लामाबाद में हज़ारों प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए.
इस घटना से जनवरी 2018 में छह साल की ज़ैनब अंसारी के बलात्कार और हत्या की यादें ताज़ा हो गई हैं, जब पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हो गए थे.
फ़रिश्ता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर #JusticeForFarishta ट्रेंड कर रहा है और लोग उसे इंसाफ दिलाने की मांग कर रहे हैं.
फ़रिश्ता के पिता ग़ुलाम नबी ने बीबीसी को बताया कि पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की.
उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझसे ऑफ़िस साफ़ करने, फ़र्नीचर हटाने और इफ़्तार के लिए बाज़ार से फल लाने को कहा."
ग़ुलाम नबी बताते हैं, "उन चार दिन मैं इतना परेशान था कि अगर दिन रात बताऊं तो भी बात ख़त्म नहीं होगी."
बुधवार को कई पुलिस अधिकारियों पर लापरवाही का मामला दर्ज किया गया.
शाहज़ाद पुलिस स्टेशन के इंचार्ज मुहम्मजद अब्बास राना को निलंबित कर दिया गया है.
हालांकि उनका कहना है कि उन्होंने मामले में कार्रवाई की और 16 मई को परिजन और पड़ोसियों से पूछताछ की थी.
उन्होंने कहा कि केस दर्ज करने में देरी के लिए परिजन ही ज़िम्मेदार हैं.
डॉन अख़बार के अनुसार, फ़रिश्ता की गुमशुदगी मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
लेकिन औपचारिक जांच रविवार को ही शुरू हुई, जब एक राजनेता ने इस्लामाबाद के इंस्पेक्टर जनरल से इसकी शिकायत की.
इसके दूसरे दिन फ़रिश्ता का क्षतविक्षत शव बरामद हुआ. इससे लोगों में आक्रोश पैदा हुआ कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.
फरिश्ता के पिता नबी ने बताया कि अब्बास राना ने शुरू में मामला दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि बच्ची अपने मन से किसी के साथ भाग गई होगी. राना ने इन आरोपों से इनकार किया है.
डॉन अख़बार के अनुसार, फ़रिश्ता की गुमशुदगी मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
लेकिन औपचारिक जांच रविवार को ही शुरू हुई, जब एक राजनेता ने इस्लामाबाद के इंस्पेक्टर जनरल से इसकी शिकायत की.
इसके दूसरे दिन फ़रिश्ता का क्षतविक्षत शव बरामद हुआ. इससे लोगों में आक्रोश पैदा हुआ कि अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.
फरिश्ता के पिता नबी ने बताया कि अब्बास राना ने शुरू में मामला दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि बच्ची अपने मन से किसी के साथ भाग गई होगी. राना ने इन आरोपों से इनकार किया है.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे रिसर्च केंद्र की योजना बनाई है जहां इस पृथ्वी को बचाने के नए रास्ते तलाशे जा सकें.
इस रिसर्च में ऐसे तरीकों की खोज की जाएगी जिससे ध्रुवों की पिघल रही बर्फ को फिर से जमाया जा सके और वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड निकाली जा सके.
इस केंद्र को इस लिए बनाया जा रहा है क्योंकि वर्तमान समय में पृथ्वी पर ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए उठाए जा रहे क़दम नाकाफ़ी लग रहे हैं.
यह पहल ब्रितानी सरकार के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर सर डेविड किंग की ओर से कराई जा रही है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ''आने वाले 10 सालों में हम जो भी करेंगे वह मानव जाति के अगले दस हज़ार सालों का भविष्य तय करेगा. इस दुनिया में ऐसा कोई भी एक केंद्र नहीं है दो इस बेहद महत्वपूर्ण विषय पर फ़ोकस हो.''
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के जलवायु वैज्ञानिक डॉक्टर एमिली शुकबर्ग ने कहा, ''नए सेंटर का मिशन जलवायु समस्या को हल करना होना चाहिए और हम उस पर विफ़ल नहीं हो सकते."
सेंटर फॉर क्लाइमेट रिपेयर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के कार्बन न्यूट्रल फ्यूचर्स इनिशिएटिव का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व डॉक्टर शुकबर्ग कर रही हैं.
ये मुहिम सामाजिक वैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को एक साथ लाएगी.
डॉक्टर शुकबर्ग ने बीबीसी को बताया, "यह वास्तव में हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है, और हम जानते हैं कि हमें अपने सभी कोशिशों के साथ इसका जवाब देने की आवश्यकता है.''
ध्रुवों की बर्फ़ दोबारा जमाना
ध्रुवों पर बर्फ़ को जमाने की कोशिशों में सबसे कारगर कदमों में से एक होगा इनके ऊपर पड़ने वाले बादलों को "चमकदार" करना है.
इसके लिए बेहद पतली नली के माध्यम से बिना मानव रहित जहाजों पर लगाया जाएगा और समुद्री पानी को को पंप से खींचा जाएगा.
इससे नमक के कण नली में आएंगे. इन नमक को बादलों तक पहुंचाया जाएगा. इससे बादल गर्मी को और भी ज़्यादा रिफ़्लेक्ट कर सकेंगे.

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